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अध्याय ३

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शान शुरुवात से ही, याने बचपन से ही दूसरों से अलग था. और हाल ही में एक जिम्मेदार वयस्क के नाते भी उसने एक अलग सा निर्णय ले लिया था, धर्मरहित जीवन जीने का. वह केवल एक धर्म से बंधा रहना नहीं चाहता था. उसने जल्दी ही अपने नये धर्म को, जिसका कोई नाम नहीं था, एक परिभाषा दे दी. परिभाषा सिर्फ एक वाक्य भर की थी. और वह एक वाक्य था, “खुद के लिए और दूसरों के लिये अच्छा महसूस करो, अच्छा सोचो और अच्छा करो.” यही मानव-धर्म है. कितनी सरलता है धर्म की इस परिभाषा में. पर शान ने इसका नाम ‘धर्म’ नहीं रखा. इसे वह उसके जीवन जीने का एकतम ‘मार्ग-दर्शक सिद्धांत’ मानता था. लाख कोशिशों के बाद भी वह खुद को जता नहीं पाया कि किसी एक धर्म का पूर्णतः पालन करके वह जीने के अंदाज़ में कोई और अधिक सुधार ला पाएगा. उसने अब तक यह देखा था कि हर एक संगठित धर्म कुछ ऐसी रूढ़ियों, परम्पराओं, सोच और नियमों में उसे अपनाने वाले को जकड़ लेता है, जो उसे पीछे खींचती हैं, जीवन में आगे ले जाने के बजाय. और शान पीछे जाने वालों में से नहीं था. छुटपन से लेकर आज तक शान ने, कई सारी सामाजिक मान्यताओं को भी, जो उसके नज़रिये में कुरी...

अध्याय २

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रात के खाने के बाद एक शाम शान की माँ एलिस और पिता युसूफ ने उसे उनके बेड-रूम में बुलाया था. एलिस ने कहा था, “आपको पता है कि मेरा आपके पिता के साथ एक अंतर्धार्मिक विवाह हुआ. फिर हमने आपको एक प्रधानत: हिन्दू अनाथालय से गोद लिया. इस समय तक युसूफ और मुझमे कोई भी मतभेद नहीं रहे. हमने इन जैसे दोनों गंभीर विषयों को बड़ी समझदारी से सुलझा लिया था. पर आपको कौन सा धर्म दिया जाए, आपको किस धर्म के औपचारिक संस्कार दिए जाए ँ , आपका हिन्दू रीतियों के तरह यज्ञोपवीत या उपनयन किया जाये अथवा इसाइयों की तरह बप्तिस्म किया जाए या मुस्लिमों की तरह खतना किया जाए. आप अल्लाह की प्रार्थना करें या यीशुमसीह की- ऐसे विषयों पर बातचीत करने से हम कतराते रहे, बचते रहे. हमें डर था कि इन बातों को लेकर हममें मतभेद न पैदा हो जाए ँ . ऐसे किसी संघर्ष में एक दूसरे से खोने का डर हमें खाये जा रहा था. और आपसे जुड़े हुए इन मुद्दों पर निर्णय लेना हम टालते गए.” “मॉम, आप चिंता न करें. इसमें बुरा लगने वाली कोई बात नहीं है.” “नहीं शान. हम अब तक इस विषय को टालते आ रहे थे. पर आप अब वयस्क हो गए हो. आप जीवन की ऐसी दहलीज पर ह...