अध्याय १६
मेधावी और संस्कार उनके विवाह के बाद अमेरिका के सैन डिएगो में बस गए. दोनों के पास बहुत अच्छी नौकरियाँ थीं. यदि विभिन्न दृष्टिकोणों से देखें तो ऐसा लगता था जैसे वे एक दूसरे के लिए ही बने थे- मूलतः एक ही देश, एक ही शहर, वही नस्ल, समान धर्म, एक ही जाति, एक ही उपजाति, वही मातृभाषा, समान शैक्षणिक पृष्ठभूमि, समान पेशेवर पृष्ठभूमि. शीघ्र ही संस्कार ने रोजाना सुबह-सुबह पाँच बजे उठने की अपनी दिनचर्या शुरू कर दी. छुट्टियों और सप्ताहांत भी वह पाँच बजे उठने का कार्यक्रम जारी रखता. प्रतिदिन इतनी सुबह अनिवार्य रूप से स्नान करने के बाद वह विस्तृत तरीके से भगवान की पूजा करता. मेधावी ईश्वर की पूजा-प्रार्थनाओं में उसके बहुत पीछे नहीं थी. लेकिन वह पाँच बजे उठ न पाती. उसके लिये छह-सात बजे का समय ज्यादा ठीक था. पर उसके पति जैसे सुबह-सुबह स्नान करना उसके बस की बात नहीं थी. सात बजे तक दोनों अपने धार्मिक कामों से निपट कर नाश्ता करते थे और अपने अपने कार्यालयों के लिये रवाना हो जाते.थे. वे उनके वैवाहिक जीवन में खुश थे और पूरी तरह से संतुष्ट थे. लगभग चार महीनों तक यह आलम बिना किसी बाधा और...